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योग हमें ‘वृद्ध’ नहीं होने देता, अयोग्य को भी योग्य बनाता है: डॉ. वर्णिका शर्मा


“सभी विकारों की एक दवा—योग, काहे घबराए”


रायपुर, 25 नवंबर 2025।
परम जीवनम् फाउंडेशन द्वारा आयोजित योगासन कला प्रदर्शन एवं सम्मान समारोह में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में AIIMS की प्रो. डॉ. मनीषा सिंह, आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य महेश तिवारी और योगाचार्य चूड़ामणि नायक उपस्थित रहे।


मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि मन-मस्तिष्क के विकार दूर करने और शारीरिक कमजोरी से निपटने का सबसे प्रभावी माध्यम योग है। उन्होंने जोर देकर कहा—
“योग हमें वृद्ध नहीं होने देता, बल्कि अयोग्य को भी योग्य बनाने की क्षमता रखता है। बालमन जैसी पवित्रता और ऊर्जा को जीवित रखना ही योग का असली स्वरूप है।”


डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में फिल्मी अंदाज़ में यह संदेश भी दिया—
“सभी विकारों और लाख दुखों की एक दवा—योग, काहे घबराए।”
उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता है कि परम जीवनम् योग केंद्र में 7 वर्ष से लेकर 77 वर्ष तक के साधक नियमित योग कर रहे हैं और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर मिसाल पेश कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र को हमेशा सक्रिय और जीवंत बनाए रखने की अपील भी की।


स्कूली बच्चों में योग के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा—
“बच्चे स्वभाव से ही निर्मल, ऊर्जावान और बालमन रखते हैं। यही कारण है कि वे योग के सबसे सुंदर प्रतिरूप होते हैं। योग से उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को नई दिशा मिलती है।”


कार्यक्रम के अंत में योग के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले साधकों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित प्रतिभागियों में मीणा बघेल, अजय साहू, अशोक सेठ, अनीता, ज्योति साहू और राधा शामिल रहीं।

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