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कोपरा जलाशय को राज्य का पहला रामसर साइट का दर्जा, सीएम साय ने कहा—छत्तीसगढ़ की जैवविविधता को मिली वैश्विक पहचान


रायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। बिलासपुर जिले स्थित कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स की सूची में शामिल करते हुए रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। यह राज्य का पहला रामसर वेटलैंड है, जिसने छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यावरण मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि कोपरा जलाशय को मिला यह सम्मान राज्य की समृद्ध जैव विविधता, जल संरक्षण प्रयासों और समुदाय-आधारित वेटलैंड प्रबंधन की अंतरराष्ट्रीय सराहना है। उन्होंने कहा, “कोपरा जलाशय की वैश्विक मान्यता हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।”
वेटलैंड संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि
राज्य शासन के अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों, वेटलैंड प्राधिकरण, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के वर्षों के संयुक्त प्रयासों के बाद कोपरा जलाशय को यह दर्जा मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार जलाशय में पक्षियों की बड़ी आवास-विविधता, दुर्लभ जलचर प्रजातियाँ और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का बनाता है।


पर्यावरण विभाग के अनुसार कोपरा जलाशय में हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं, जिससे यह क्षेत्र बर्ड वॉचिंग और वैज्ञानिक अध्ययन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।


छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 का लक्ष्य—20 वेटलैंड को रामसर दर्जा
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के कम से कम 20 वेटलैंड्स को रामसर सूची में शामिल कराने का लक्ष्य रखा है। कोपरा जलाशय का चयन इस दिशा में पहला बड़ा कदम है।


उन्होंने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामुदायिक सहयोग और संवेदनशील नीतियाँ एक साथ काम करें, तो प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सकता है।


इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर दर्जा मिलने से कोपरा जलाशय क्षेत्र में इको-टूरिज्म की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, बोटिंग प्रबंधन, होम-स्टे, स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे अनेक रोजगार अवसर पैदा होंगे।


जलाशय के आसपास स्थित गाँवों में सामुदायिक सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण मॉडल विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।


मुख्यमंत्री का जनता से आह्वान—धरोहर की रक्षा में आगे आएं
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि कोपरा जलाशय केवल एक जल क्षेत्र नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा, “हम सभी का कर्तव्य है कि इस अनमोल वेटलैंड की सुरक्षा और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल, सुरक्षित प्रकृति और स्वस्थ पर्यावरण छोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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