रायपुर / विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में जीएसटी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट के 228 करोड़ रुपए के भुगतान का मामला गरमा गया। विधायक जनक ध्रुव ने भुगतान की प्रक्रिया, मद और ठेकेदारों को दी गई राशि का पूरा ब्योरा मांगा, जिस पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक जनक ध्रुव ने आरोप लगाया कि जीएसटी सिक्योरिटी डिपॉजिट से जुड़े भुगतान की जानकारी लगातार मांगे जाने के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने पूछा कि किन मदों से, किसकी अनुमति से और किन ठेकेदारों को कितनी राशि का भुगतान किया गया।
इस पर उपमुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि पिछली सरकार के समय 228 करोड़ रुपए की राशि अनुरक्षण मद के तहत मेंटेनेंस और नवीनीकरण कार्यों के लिए दी गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय बजट में प्रावधान नहीं था, फिर भी 2023 में टेंडर जारी कर काम शुरू किया गया और संबंधित मदों—एसडी, पीजी, एजीएस और रॉयल्टी—के तहत भुगतान कर दिया गया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि ठेकेदारों की देनदारी थी, जिसे बाद में नई सरकार ने वित्त विभाग से अनुमति लेकर जारी किया। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि शेष जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मामले में विधायक द्वारकाधीश यादव ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग उठाई। वहीं विधायक देवेंद्र यादव ने जांच की समय-सीमा तय करने की बात कही।
सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विशेष अधिकारी से जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
